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Harsha Bhogle ( Indian commentator ) Motivational Speech


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जीवन में 'रन' बनाते रहें, शोहरत पीछे-पीछे आएगी।
बॉर्डर ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज क्रिकेटर रहे हैं। उन्होंने मुझे एक बात कही ये बात वो हर ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी को कहते कि 'जीवन में सिर्फ रनों की परवाह करना और डॉलर्स यानी रुपए-पैसे खुद तुम्हारे पीछे आएंगे। हमारे जीवन में एक्सीलेंस का रास्ता अपने कर्मों से होकर जाता है। मैंने कई युवा क्रिकेटर्स को देखा है, जो पैसों के पीछे भागे और अपने मूल काम थानी रन बनाने से भटक गए। रूपक के तौर पर कहें तो न बनाते रहें, अपने काम प्रदर्शन पर ध्यान देते रहें। शोहरत खुद-ब-खुद मिल
एलन
हमें नहीं पता होता है कि कौन हमारे काम को देख रहा है, कौन हमें सुन रहा है, क्या पढ़ रहा है। अपना 100 फीसदी देने का यह सच्चा आनंद है। क्या पता अगला बड़ा अवसर आपके दरवाजे पर दस्तक दे रहा हो। एक बार में कमेंट्री में सुनील गावस्कर और सचिन तेंदुलकर की तुलना कर रहा था। मैंने कहा जैसे
भारत की अर्थव्यवस्था बदल रही है। तेंदलकर नई अर्थव्यवस्था के उत्पाद हैं और गावस्कर लाइसेंस राज के उत्पाद गावस्कर ऐसे बैटिंग करते थे जैसे उनके पास बैंक डिपॉजिट हो और तेंदुलकर शेयर बाजार की तरह बैटिंग करते। मेरी इस टिप्पणी के बाद अचानक लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि मुझमें क्रिकेट के अलावा भी बहुत कुछ है। मैं यही कहना चाहता हूं कि जब आप 100% देते हैं, तो लोगों आपको
नोटिस करते ही हैं। क्या आप एक लीटर की बोतल में दो लीटर कोल्ड ड्रिंक भर सकते हैं? ऐसे ही किसी भी काम में आप अपना 100% से ज्यादा नहीं दे सकते। पर हो आप अपना 100% हर क्षण दे सकते हैं।
हमेशा ऐसे लोगों की सोहबत में रहे, जो ज्ञान के मामले आपसे बेहतर हो। निर क्षण आप ऐसे लोगों का साथ चुन लेते हैं, जो आपके समकक्ष या ज्ञान में कमतर हों, आपका सीखना रुक जाता है। ये सुनने में स्वार्थ प्रतीत होता है, लेकिन ये करना कमेंट्री की शुरुआत की, तो मेरे पास कोई था जिसे देखकर प्रेरित हो सके। कोई हीरो नहीं समझ आता था। तब मैंने मैदान पर कैमरामैन को देखना शुरू किया। मिडविकेट कैमरामैन ने बताया कि वह अपने जीवन में कभी भी स्टंपिंग को रिकॉर्ड करने से नहीं चूके मेरे लिए यह व्यक्ति हिरो बन गया। अपने नायक जी
शुरुआती दिनों के दौरान में माथी कमेंटेटर के साथ प्रतिस्पर्धा करता था। वे मुझसे पूछठ कि मैंने कितना क्रिकेट खेला है। तब मैंने अपना अहम् (इंगो) बगल में रखा। मैं सिर्फ साबित करना चाहता था कि खेल को कितने अच्छी तरीके से समझता है। अगर आप आम और गुस्सा भरा होगा, तो विरोधी की जरूरत हो होगी। खुद को ही अपना विरोधी बना लेंगे। अपने इस आम को अपना शत्रु मत बनाइए ।
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