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यह कहानी, रसेल एच. कॉनवेल की बहु-चर्चित पुस्तक एकर्स आफ़ डॉयमण्डस का सारांश है।
यह कहानी लगभग हम सभी की है। जिस तरह हीरों का अकूत भण्डार किसान के क़दमों के नीचे ही उसके खेतों में मौज़ूद था लेकिन वह उन्हें पहचान नहीं पाया और दर-दर भटकता रहा। ठीक उसी तरह हम भी सफलता पाने के लिए अच्छे अवसरों की तलाश में भटकते रहते हैं। अक़्सर हम या तो उन अवसरों को पहचान नहीं पाते या पहचान कर भी नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जो प्रायः हमारे आस-पास ही छुपे रहते हैं। यदि हम थोड़ी सी बुद्धिमानी और परख़ से उन अवसरों को पहचान कर, धैर्य, लगन और मेहनत से काम करें तो सफलता कोई दूर की कौड़ी नहीं है।
By Manoj Shrivastavaयह कहानी, रसेल एच. कॉनवेल की बहु-चर्चित पुस्तक एकर्स आफ़ डॉयमण्डस का सारांश है।
यह कहानी लगभग हम सभी की है। जिस तरह हीरों का अकूत भण्डार किसान के क़दमों के नीचे ही उसके खेतों में मौज़ूद था लेकिन वह उन्हें पहचान नहीं पाया और दर-दर भटकता रहा। ठीक उसी तरह हम भी सफलता पाने के लिए अच्छे अवसरों की तलाश में भटकते रहते हैं। अक़्सर हम या तो उन अवसरों को पहचान नहीं पाते या पहचान कर भी नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जो प्रायः हमारे आस-पास ही छुपे रहते हैं। यदि हम थोड़ी सी बुद्धिमानी और परख़ से उन अवसरों को पहचान कर, धैर्य, लगन और मेहनत से काम करें तो सफलता कोई दूर की कौड़ी नहीं है।