"वो"
वो शून्य है
अब है तो फिर शून्य कैसे
और शून्य तो फिर है कैसे
लेकिन वो दोनों
कबीर समझायें तो उलटबांसी हो जाए
गोरख समझायें तो गोरख धंधा हो जाए
वो निराकार है
और साकार भी
साकार में निराकार
और निराकार में साकार
वो प्रभु
वो स्वयम्भु
वो कर्ता और कृति भी
वो नृत्य और नर्तकी भी
वो अभिनय और अभिनेता भी
वो तुम भी
और वो मैं भी
बस वो ...वो ...वो ...वो
"वो"