फागुन की मदमस्त बहारें और उसपर ऋतुराज बसंत की आगमन, कोयल की कूक और महुआ की मादकता, आमो की मंजरियाँ और सरसों की पीली चूनर--- इन सभी छटाओं को स्वयं में समेटे हुए हैं आज की छोटी छोटी कविताएं और फागुन के दोहे।
फागुन की मदमस्त बहारें और उसपर ऋतुराज बसंत की आगमन, कोयल की कूक और महुआ की मादकता, आमो की मंजरियाँ और सरसों की पीली चूनर--- इन सभी छटाओं को स्वयं में समेटे हुए हैं आज की छोटी छोटी कविताएं और फागुन के दोहे।