ईदगाह प्रेमचंद की उर्दू में लिखी हुई कहानी है। यह प्रेमचंद की सुप्रसिद्ध कहानियों में एक है। इस में एक अनाथ बालक की कहानी बताई गई है। ' ईदगाह ' कहानी का प्रारम्भ रमजान के पूरे तीस दिनों के बाद आयी ईद की हलचल से किया गया है । गाँव के सभी लोग ईद मनाने की तैयारी करते हैं और बच्चे भी इस अवसर पर खुश होते हैं । गाँव के एक बालक हामिद के माता - पिता नहीं थे । वह अपनी बूढ़ी दादी अमीना के साथ रहता था । गाँव के अन्य | बच्चों के साथ हामिद भी ईदगाह गया । वहाँ पर मेरा - सा लगा था । सभी रोजेदारों ने वहाँ पर एक साथ नमाज अदा की । अमीना गरीब थी , वह हामिद के लिए चिन्तित रहती थी । उसने ईदगाह मेले में जाने के लिए हामिद को तीन पैसे दिये । गाँव के महमूद , मोहसिन आदि बच्चों के साथ हामिद की रोचक बातें होती रहीं । अन्य बच्चों के पास काफी पैसे थे , इसलिए वे मनपसन्द खिलौने व मिठाई आदि लेने लगे । परन्तु हामिद के पास कुल तीन पैसे होने से कुछ नहीं खरीद पाया । उस समय उसे अपनी दादी का ध्यान आया और उसने एक चिमटा खरीदा । घर लौटने । पर अमीना ने उसके हाथ में चिमटा देखा , तो वह कुछ नाराज हुई । परन्तु जब छ देना हामिद ने चिमटा खरीदने का कारण बताया तो अमीना का क्रोध स्नेह में बदल गया । वह गद्गद् होकर हामिद को दुआएँ देने लगी ।