
Sign up to save your podcasts
Or


ईर्ष्या : तू न गई मेरे मन से...! ईर्ष्या एक ऐसा विष है...एक ऐसा जहर है..., जो इंसान को भीतर ही भीतर घुन की भांति विनष्ट कर देता है, इससे कैसे बचा जाए..?
By Dr. Girish Tripathiईर्ष्या : तू न गई मेरे मन से...! ईर्ष्या एक ऐसा विष है...एक ऐसा जहर है..., जो इंसान को भीतर ही भीतर घुन की भांति विनष्ट कर देता है, इससे कैसे बचा जाए..?