इरफ़ान ख़ान से मैं कभी मिला नहीं। पर उस इंसान की आंखें मुझे बताती की वो ज़िन्दगी जी रहा है। हर किरदार को पूरी ईमानदारी और सहजता से करना। ज़िन्दगी में उनसे मिलने की तमन्ना थी वो पूरी नहीं हो पाई। उनका अभिनय भूलते नहीं भूलता।
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