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May 09, 2020इस पार उस पार | कविता - हरिवंशराय बच्चन | स्वर - राजा रवि5 minutesPlayइस पार, प्रिये मधु है तुम हो, उस पार न जाने क्या होगा!यह चाँद उदित होकर नभ में कुछ ताप मिटाता जीवन का,लहरालहरा यह शाखाएँ कुछ शोक भुला देती मन का,कल मुर्झानेवाली कलियाँ हँसकर कहती हैं मगन रहो,बुलबुल तरु की फुनगी पर से संदेश सुनाती यौवन का,तुम देकर मदिरा के प्याले मेरा मन बहला देती हो,उस पार मुझे बहलाने का उपचार न जाने क्या होगा!इस पार, प्रिये मधु है तुम हो, उस पार न जाने क्या होगा!...moreShareView all episodesBy Vichar BinduMay 09, 2020इस पार उस पार | कविता - हरिवंशराय बच्चन | स्वर - राजा रवि5 minutesPlayइस पार, प्रिये मधु है तुम हो, उस पार न जाने क्या होगा!यह चाँद उदित होकर नभ में कुछ ताप मिटाता जीवन का,लहरालहरा यह शाखाएँ कुछ शोक भुला देती मन का,कल मुर्झानेवाली कलियाँ हँसकर कहती हैं मगन रहो,बुलबुल तरु की फुनगी पर से संदेश सुनाती यौवन का,तुम देकर मदिरा के प्याले मेरा मन बहला देती हो,उस पार मुझे बहलाने का उपचार न जाने क्या होगा!इस पार, प्रिये मधु है तुम हो, उस पार न जाने क्या होगा!...more
इस पार, प्रिये मधु है तुम हो, उस पार न जाने क्या होगा!यह चाँद उदित होकर नभ में कुछ ताप मिटाता जीवन का,लहरालहरा यह शाखाएँ कुछ शोक भुला देती मन का,कल मुर्झानेवाली कलियाँ हँसकर कहती हैं मगन रहो,बुलबुल तरु की फुनगी पर से संदेश सुनाती यौवन का,तुम देकर मदिरा के प्याले मेरा मन बहला देती हो,उस पार मुझे बहलाने का उपचार न जाने क्या होगा!इस पार, प्रिये मधु है तुम हो, उस पार न जाने क्या होगा!
May 09, 2020इस पार उस पार | कविता - हरिवंशराय बच्चन | स्वर - राजा रवि5 minutesPlayइस पार, प्रिये मधु है तुम हो, उस पार न जाने क्या होगा!यह चाँद उदित होकर नभ में कुछ ताप मिटाता जीवन का,लहरालहरा यह शाखाएँ कुछ शोक भुला देती मन का,कल मुर्झानेवाली कलियाँ हँसकर कहती हैं मगन रहो,बुलबुल तरु की फुनगी पर से संदेश सुनाती यौवन का,तुम देकर मदिरा के प्याले मेरा मन बहला देती हो,उस पार मुझे बहलाने का उपचार न जाने क्या होगा!इस पार, प्रिये मधु है तुम हो, उस पार न जाने क्या होगा!...more
इस पार, प्रिये मधु है तुम हो, उस पार न जाने क्या होगा!यह चाँद उदित होकर नभ में कुछ ताप मिटाता जीवन का,लहरालहरा यह शाखाएँ कुछ शोक भुला देती मन का,कल मुर्झानेवाली कलियाँ हँसकर कहती हैं मगन रहो,बुलबुल तरु की फुनगी पर से संदेश सुनाती यौवन का,तुम देकर मदिरा के प्याले मेरा मन बहला देती हो,उस पार मुझे बहलाने का उपचार न जाने क्या होगा!इस पार, प्रिये मधु है तुम हो, उस पार न जाने क्या होगा!