यादों का भी बड़ा अजीब मसला है । बेवक्त बेमौसम की बारिश की तरह, कमबख्त कभी भी आ जाती है , और पीछे छोड़ जाती हैं तो नाम हुई आंखें, और तन्हाई भरी रात । बस इतनी सी बात ।
यादों का भी बड़ा अजीब मसला है । बेवक्त बेमौसम की बारिश की तरह, कमबख्त कभी भी आ जाती है , और पीछे छोड़ जाती हैं तो नाम हुई आंखें, और तन्हाई भरी रात । बस इतनी सी बात ।