sanganer kesari

jain dharm


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आज हम जैन धर्म के बड़े सार्वजनिक उत्सवों पर बात कर रहे हैं - जैसे कल्यानक महोत्सव। मेरा सवाल है, क्या ये उत्सव धर्म का सार हैं या सिर्फ एक बाहरी दिखावा जो हमें आंतरिक साधना से भटकाता है?

 

Corey

मेरा मानना है कि ये उत्सव समुदाय को एक साथ लाते हैं, आस्था को सार्वजनिक रूप से प्रकट करते हैं, और ये आधुनिक समय में धर्म को जीवंत रखने का एक तरीका भी है। ये लोगों को एक दूसरे से जोड़ते हैं, जो बहुत ज़रूरी है।

 

Hope

मैं समझती हूं, पर मेरा दृष्टिकोण ये है कि जैन धर्म का असली सार व्यक्तिगत आध्यात्मिक अभ्यास में निहित है। इन भव्य समारोहों की चकाचौंध उस आंतरिक खोज के महत्व को कहीं न कहीं कम कर सकती है, ऐसा मुझे लगता है।

 

Corey

आपकी बात में दम है। लेकिन इन आयोजनों की प्रेरणा भी देखिए। पदमपुरा में चार अलग-अलग दिगंबर संघ एक साथ आए। विशेषकर आचार्य प्रसन्न सागर महाराज और आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज का मिलन एक बड़ी घटना थी।

 

Hope

वो एकता महत्वपूर्ण है, पर क्या इतनी विशालता आवश्यक है? जैसे पंच कल्यानक प्रतिष्ठा महोत्सव। कल्यानक का अर्थ है तीर्थंकर के जीवन की पांच मंगलकारी घटनाएं: गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान, और मोक्ष।

 


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sanganer kesariBy sanganer kesari