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Hindi scripts:
ढूँढोगी यदि मुझे तो मिलूंगा मैं तुम्हे उस निष्क्रिय चेतना में
जो दब गयी है अब, एक मोटी मिट्टी की परत के तले, जीवाश्म बन गयी है
ढूंढोगे तो शायद आसानी से मिलेगा नहीं
क्योकि उसके ऊपर अब एक इमारत बन गयी है
इमारत में रहने वाले व्यक्ति को क्या पता ईमारत के आधार के
बारे में, वह तो बस ईमारत को पहचानता है
स्मृतियों से बनता है किरदार
मै खो जाऊ अगर तो मत ढूँढना, मत भटकना दर दर,
मै अब जीवाश्म बन चूका हूं
मत आकना मुझे, नए किरदारों के बीच.
मै तो बस एक जीवाश्म हूं
मुझे पता है घनत्वता से डरती हो तुम
इसलिए अपने मन के अन्दरूनी विचारों तक कभी नहीं जाती
तुम्हे पता है वह मिलेगा तो सिर्फ एक जीवाश्म सा, द्रवित, मानव का ह्रदय,
शायद तुम्हे पसंद है छिछली झील और समन्दर के किनारे
गोते लगाते हो और जीते रहते हो उस अद्भुत संसार, जहां सूरज की रौशनी और मंद हवाएं हैं
अब तुम भूल गये वह रोमांच, वह हीरो का पहाड़,
जो खुद के भार से खुद में समाहित हो गया है और अब वह बन चुका है जीवाश्म
जब कभी होगी बारिश तो शायद कभी निकलू मै,
माटी के सुगन्ध के रूप में
या फिर बनके बगीचे का फूल बनकर
मै उस पारस पत्थर सा ह, जिसके मिलते तुम सुनहरे और
जिसके जाते तुम, तुम हो जाते हो
मत आकना मुझे, मत ढूँढना मुझे अपने स्मृतियो के उस तले में,
जिसकी गहराई में तुम डूब जाओ, जहां तुम्हारे विचारों की रोशनी नहीं पहुँचती,
जहा घनत्व भी थोड़ा बढ़ जाता है
विचार शून्यता में जब खली बैठोगे तुम
तब एक विचार लेगा जन्म
तब एक विचार लेगा जन्म
यदि वह विचार मै हु तो समझ जाना
अब वक़्त हो चला है
वापिस जाने का
अंत..
By Viking CubesAtsHindi scripts:
ढूँढोगी यदि मुझे तो मिलूंगा मैं तुम्हे उस निष्क्रिय चेतना में
जो दब गयी है अब, एक मोटी मिट्टी की परत के तले, जीवाश्म बन गयी है
ढूंढोगे तो शायद आसानी से मिलेगा नहीं
क्योकि उसके ऊपर अब एक इमारत बन गयी है
इमारत में रहने वाले व्यक्ति को क्या पता ईमारत के आधार के
बारे में, वह तो बस ईमारत को पहचानता है
स्मृतियों से बनता है किरदार
मै खो जाऊ अगर तो मत ढूँढना, मत भटकना दर दर,
मै अब जीवाश्म बन चूका हूं
मत आकना मुझे, नए किरदारों के बीच.
मै तो बस एक जीवाश्म हूं
मुझे पता है घनत्वता से डरती हो तुम
इसलिए अपने मन के अन्दरूनी विचारों तक कभी नहीं जाती
तुम्हे पता है वह मिलेगा तो सिर्फ एक जीवाश्म सा, द्रवित, मानव का ह्रदय,
शायद तुम्हे पसंद है छिछली झील और समन्दर के किनारे
गोते लगाते हो और जीते रहते हो उस अद्भुत संसार, जहां सूरज की रौशनी और मंद हवाएं हैं
अब तुम भूल गये वह रोमांच, वह हीरो का पहाड़,
जो खुद के भार से खुद में समाहित हो गया है और अब वह बन चुका है जीवाश्म
जब कभी होगी बारिश तो शायद कभी निकलू मै,
माटी के सुगन्ध के रूप में
या फिर बनके बगीचे का फूल बनकर
मै उस पारस पत्थर सा ह, जिसके मिलते तुम सुनहरे और
जिसके जाते तुम, तुम हो जाते हो
मत आकना मुझे, मत ढूँढना मुझे अपने स्मृतियो के उस तले में,
जिसकी गहराई में तुम डूब जाओ, जहां तुम्हारे विचारों की रोशनी नहीं पहुँचती,
जहा घनत्व भी थोड़ा बढ़ जाता है
विचार शून्यता में जब खली बैठोगे तुम
तब एक विचार लेगा जन्म
तब एक विचार लेगा जन्म
यदि वह विचार मै हु तो समझ जाना
अब वक़्त हो चला है
वापिस जाने का
अंत..