जिम्मेदारी जब हमारी दिली इच्छा भी बन जाती है तो उसमें संतोष हर खुशी मिलती है जिंदगी में जिम्मेदारी के प्रति हमारी प्रतिबद्धता कितनी है जिससे हमारा विश्वास बनता है जीत के लिए खेलने के पीछे कोई प्रेरणा होती है जबकि हार से बचने के लिए खेलने का कारण हताशा होती है या तो सच है कि हमें आदर्श परिस्थितियां कभी नहीं मिलेंगे फिर भी हमें खुद को प्रोत्साहित करना है अपनी प्रेरणा को प्रबल करना है कार्य क्षमता को बढ़ाना है और जीत का आनंद बढ़ाना है जिंदगी के बुरी घटनाओं से निपटने के तरीके पर हमारा नियंत्रण होता है अब तक हमें करना है कि हालत बिगड़ जाए तुम उसका सामना करें या एक दूसरे पर इल्जाम लगाएं अच्छे चरित्र वाले लोगों से जुड़ना है जिम्मेदारी को महसूस करना है अनुशासित रहना है।