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कर्म में लिप्त न होकर और कर्म फल कि इच्छा न रखते हुए कर्म करना ही गीता का सन्देश है और इसी से जीवन मरण के चक्र या पुनर्जन्म से मुक्ति हो सकती है। अतः कर्म करो आसक्ति और फल कि चाहत के बिना।
By Dr. Archika Didiकर्म में लिप्त न होकर और कर्म फल कि इच्छा न रखते हुए कर्म करना ही गीता का सन्देश है और इसी से जीवन मरण के चक्र या पुनर्जन्म से मुक्ति हो सकती है। अतः कर्म करो आसक्ति और फल कि चाहत के बिना।

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