जननी का जीवन में योगदान नहीं ऋण होता है जो जन्म जन्मांतरों के बाद भी इंसान नहीं चुका पाता। उम्र या अन्य शारीरिक चुनौतियाँ भी उसके उस अथाह स्नेह और दुलार को नहीं नहीं मोटा सकती। और स्वर्ग की कल्पना अगर है तो वो माँ और उसका वो प्यार है। या कहें जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी ।
---
Send in a voice message: https://anchor.fm/harish-benjwal/message