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क्या-आप-ज्योतिषी-बनना-चाहते-है-तो-पहले-सीखे-ये-मूल-मंत्र
पंचांग का ज्ञान होना परम आवश्यक है। पंचांग अर्थात जिसके पाँच अंग है तिथि, नक्षत्र, करण, योग, वार। इन पाँच अंगो के माध्यम से ग्रहों की चाल की गणना होती है।
तिथिः
कुल तिथियाँ 16 होती है,जो पंचांग में कृष्ण पक्ष व शुकल पक्ष के अंतर्गत प्रदर्शित होती है,तिथियों के नाम एकम् द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वाद्वशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, अमावस्या और पूर्णिमा है।
By sanganerkesariक्या-आप-ज्योतिषी-बनना-चाहते-है-तो-पहले-सीखे-ये-मूल-मंत्र
पंचांग का ज्ञान होना परम आवश्यक है। पंचांग अर्थात जिसके पाँच अंग है तिथि, नक्षत्र, करण, योग, वार। इन पाँच अंगो के माध्यम से ग्रहों की चाल की गणना होती है।
तिथिः
कुल तिथियाँ 16 होती है,जो पंचांग में कृष्ण पक्ष व शुकल पक्ष के अंतर्गत प्रदर्शित होती है,तिथियों के नाम एकम् द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वाद्वशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, अमावस्या और पूर्णिमा है।