दैनिक जीवन में किसी भी कार्य के सफल होने के लिए एकाग्रता की अत्यंत आवश्यकता है। मनोज कुमार जी एक प्रेरक एवं कुशल वक्ता हैं और गढ़मुक्तेश्वर, हापुड़ ज़िला, उत्तर प्रदेश के स्कूलों और अन्य संस्थाओं में छात्रों को पिछले दस सालों से प्रेरित करते आ रहे हैं। मनोज जी के पिताजी स्वतन्त्रा संग्राम सेनानी थे और आज़ाद हिन्द फ़ौज (INA) के सिपाही रहे। उनकी बातें अमूल्य थीं जिनका प्रभाव मनोज जी पर पड़ा, ऐसा वो बताते हैं। आज़ाद हिन्द फौज से सेवानिवृत्त होने के बाद उनके पिता प्राइवेट सेक्टर में रहे और साथ ही साथ उनहोंने अपने ग्राम में एक मार्केट बनायी जिसमें चार दुकानें थीं । ये बात लगभग 35 वर्ष पूर्व की है उस वक़्त कई लोगों ने उनसे कहा कि ये दुकानें आपको शहर में बनानी चाहिए थीं उस बात पर उनके पिता जी बोले की हमें गाँवों को शहर बनाना है।आज हम देखते हैं अगर गाँवों में रोजगार के साधन होते तो शहर में लोग मजदूरी करने नहीं जाते।
कविराज में इस एपिसोड में वो अपना अनुभव साझा कर रहे हैं। अस्वीकरण: कविराज चैनल में व्यक्त की गई राय वक्ताओं और प्रतिभागियों की व्यक्तिगत रायों में से एक है। जरूरी नहीं है कि वे कविराज पॉडकास्ट चैनल या एंकर की राय या विचारों को दर्शाते हों।
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