ये कविता रामधारी सिंह दिनकर द्वारा लिखी गयी है , जिसमे वे अपनी कलम से संवाद करते हुए , अब स्वतंत्रता सेनानियों , शहीदों के लिए लिखने को कहते हैं । उनके त्याग , उनके योगदान उनके शहादत के बारे में ... सुनी अनसुनी बातें लिखने को कहते हैं । ये कविता राष्ट्रवाद से ओत-प्रोत और उत्साह भर देने वाली है ।