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मनोरमा को जो संगीत अपनी ओर खींच रहा था। जिसके लिए वह व्याकुल हो रही थी, दरअसल वह उसी के अन्दर प्रवाहित हो रहा था। संगीत के रूप में यह आत्म सुख उसकी अच्छाईयों के फलस्वरूप उत्पन्न हुआ था।
By Sachin Gangwarमनोरमा को जो संगीत अपनी ओर खींच रहा था। जिसके लिए वह व्याकुल हो रही थी, दरअसल वह उसी के अन्दर प्रवाहित हो रहा था। संगीत के रूप में यह आत्म सुख उसकी अच्छाईयों के फलस्वरूप उत्पन्न हुआ था।