Sahityalaya

कहानी। जुर्माना। मुंशी प्रेमचंद


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तंगहाली में जीवन व्यतीत करने वाली ‘अल्ला रक्खी’ जुर्माने से बचने का पूरा प्रयास करती है लेकिन हमेशा असफल रहती है। हर महीने उसके वेतन से कुछ न कुछ रूपए कट ही जाते हैं। यही कारण है कि वह दरोगा को हमेशा कोसती रहती है लेकिन फिर एक घटना दरोगा के प्रति उसके दृष्टिकोण को बदल देती है।

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SahityalayaBy Sachin Gangwar