Sahitya sangam Madhu

कहानी : "कैसे-कैसे दर्द" (डाॅ सुषमा गुप्ता)


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........मैंने घबराकर आँखें खोल दी पर ऐसा करने से कभी कोई ज़हन से मिटे हैं भला ! इंसान के स्वभाव में एक बात कितनी अजीब है, हम जिस बारे में सबसे कम सोचना चाहें, अक्सर वही बात सबसे ज़्यादा दिल-दिमाग़ पर चोट करती रहती है, बार-बार, लगातार । सहसा पैर पर कुछ थिरकन हुई..........................
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Sahitya sangam MadhuBy Madan Lal