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कई बार वैमनस्य की ग्रन्थियां भोले-भाले बालकों की तुतलाती सहृदय वाणी के मार्मिक आघात पाकर सहज ही खुल जाती है। ‘सुलह’ ऐसी ही एक कहानी है।
By Sachin Gangwarकई बार वैमनस्य की ग्रन्थियां भोले-भाले बालकों की तुतलाती सहृदय वाणी के मार्मिक आघात पाकर सहज ही खुल जाती है। ‘सुलह’ ऐसी ही एक कहानी है।