मालवा माटी गहर गंभीर
पग पग रोटी डग डग नीर
कुछ ऐसा है खुशियों का नगर मांडू। वो स्थल जो गवाह है अमर प्रेम का। मांडू ने मुख्य रूप से चार वंशों कार्यकाल देखा है। जिनमें परमार काल, सुल्तान काल , मुगल काल और पवार काल। रानी रूपमति और बाज बहादुर के अमर प्रेम का गवाह है मांडू। जहाज महल मांडू का चर्चित स्मारक है। एक महल जो चारों तरफ से पानी से घिरा होने के साथ मध्य में स्थित है जहाज की आकृति में जहाज महल। पानी की कल कल आवाज और महल का शौर्य सहसा पर्यटकों का मन मोह लेता है। जहाज महल में दो तलाब कपूर और मुंज है। जिनके बीच जहाज महल बना हुआ है।लगभग 120 मीटर लंबे इस खूबसूरत महल को दूर से देखने में ऐसा लगता है मानो तलाब के बीच कोई सुंदर सा जहाज तैर रहा हो। ऊंची ऊंची मीनारे, किलो की संरचना और शौर्य की गाथा गाती किलो की दिवारें मन और दिल को कुछ देर के लिए मांडू में खो जाने को कहती है। यहां के विशाल इमली के पेड़ और मीठे सीताफलों से लदे पेड़ देख पर्यटकों के मुंह में पानी आना स्वाभिक है। यदि आप मांडू आ रहे हैं तो एक बार यहां इमली , सीताफल और कमलगट्टे का जरूर स्वाद ले।
मांडू में लगभग 12 प्रवेश द्वार है। जिनमे सबसे प्रमुख है मांडू का प्रवेश द्वार दिल्ली दरवाजा। यह खड़ी ढाल के रूप में घुमावदार मार्ग पर बनाया गया है। जहां पहुंचने पर हाथियों की गति धीमी हो जाती है। दिल्ली दरवाजे से मांडू के प्रमुख दरवाजों की शुरूआत होती है। इसके बाद आलमगीर दरवाजा, भंगी दरवाजा, रामपोल, जहांगीर , तारापुर दरवाजे आते है। मुगल वास्तुकला के साथ ही जैन और हिंदु स्थापत्य का उदाहरण है।आगे बढ़ते ही जब आप अशरफी महल पहुंचते तो आपको मुलगिया स्थापत्य कला देखने को मिलती है।
हिंडोला महल मांडू के खूबसूरत महलों में से एक है। हिंडोला यानि झूला। इस महल की खासियत है ये कि महल की दीवारे कुछ झुकी हुई है। और देखने पर महल झूले की तरह प्रतीत होता है। इसी कारण इस महल का नाम हिंडोला महल पड़ा। मांडू का सबसे खूबसूरत और अमर प्रेम की निशानी रानी रूपमति का महल। रानी रूपमति का महल प्रतीक है प्रेम और समर्पण की। महल का निर्माण राजा बाजबहादुर ने रानी रूपमति के लिए कराया था। कहा जाता है कि रानी रुपमति मां नर्मदा के दर्शन के बिना अन्न जल ग्रहण नहीं करती थीं। और राजा बाजबहादुर ने नर्मदा दर्शन सुलभ बनाने के इस महल का निर्माण कराया। महल प्रतीक है प्रेम को अमरता देने का। राजा बाजबहादुर ने रानी रूपमति के लिए रेवा कुंड का भी निर्माण कराया। वो इसलिए कि रानी को पानी की पर्याप्त व्यस्था होती रहे। तो आईए और इस प्रेम के प्रतीक और खुशियों के नगर का मांडू दीदार कीजिए।