खिस्सा-ए-जिंदगी

कमाल का दिमाग...


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बहुत दिनों से एक पड़ोसी नहीं दिखे l मुझे लगा, कहीं "निपट" तो नहीं गए ....!

यही सोच कर आज मैं उनके ? घर चला गया l देखा तो उनके ? पैर में प्लास्टर चढ़ा हुआ था।

उसे देख कर मेरे "कब" और "कैसे" वाले सवालों पर उन्होंने "रहस्यमयी मुस्कान" के साथ धीरे से जवाब दिया...."टैन्शन मत लो” , मुझे हुआ कुछ नहीं है।

जब तक लॉक-डाउन लगा है, कहीं जाना तो था नहीं....इसलिये दुकान से आते वक्त पैर में प्लास्टर चढ़वा लिया था.....नहीं तो.... पत्नी जी काम करवा-करवा कर कमर तोड़ देती अब.... आराम ही आराम है और सेवा भी भरपूर मिल रही है। काम करवाना तो दूर, पानी के खाली ग्लास तक को हाथ लगाने नहीं देती। उपर से दिन भर ये सुनने को मिलता है.... इस बहाने आपकी "सेवा" का अवसर पाकर मैं तो "धन्य" हो गई....!!

कमाल का दिमाग पाया है बन्दे ने l

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खिस्सा-ए-जिंदगीBy Avinash K Shahi