
Sign up to save your podcasts
Or


Koi dost hai na raqeeb hai/ कोई दोस्त है न रक़ीब है
कोई दोस्त है न रक़ीब है
तेरा शहर कितना अजीब है
(रक़ीब = प्रेमिका का दूसरा प्रेमी, प्रेमक्षेत्र का प्रतिद्वंदी)
वो जो इश्क़ था वो जुनून था
ये जो हिज्र है ये नसीब है
(हिज्र = बिछोह, जुदाई)
यहाँ किस का चेहरा पढ़ा करूँ
यहाँ कौन इतना क़रीब है
मैं किसे कहूँ मेरे साथ चल
यहाँ सब के सर पे सलीब है
koi dost hai na raqeeb hai lyrics shayari | koi dost hai na raqeeb hai lyrics | koi dost hai na raqeeb hai lyrics urdu |
By Manoj AgarwalKoi dost hai na raqeeb hai/ कोई दोस्त है न रक़ीब है
कोई दोस्त है न रक़ीब है
तेरा शहर कितना अजीब है
(रक़ीब = प्रेमिका का दूसरा प्रेमी, प्रेमक्षेत्र का प्रतिद्वंदी)
वो जो इश्क़ था वो जुनून था
ये जो हिज्र है ये नसीब है
(हिज्र = बिछोह, जुदाई)
यहाँ किस का चेहरा पढ़ा करूँ
यहाँ कौन इतना क़रीब है
मैं किसे कहूँ मेरे साथ चल
यहाँ सब के सर पे सलीब है
koi dost hai na raqeeb hai lyrics shayari | koi dost hai na raqeeb hai lyrics | koi dost hai na raqeeb hai lyrics urdu |