ये जोशीली कविता हमे जीवन मे सफलता प्राप्त करने का मूल मंत्र बताती है। श्री सोहनलाल द्विवेदी की लिखी यह कविता हमे गिर के उठने औऱ उठकर संभालने तथा पुनः प्रयास करने को प्रेरित करती है। यह मोटिवेशनल कविता हमे कहती है कि एक नन्ही सी चींटी अपने रास्ते मे आने वाली दीवार पे जब चढ़ती है तो उस प्रयास में वह सैकड़ों बार नीचे गिर जाती है, वह फिर भी बार बार चढ़ती है, जबतक वह चढ़ नही जाती हार नही मानती है तो हम तो सृष्टि के महानतम प्राणी मानव है, हम एक ही प्रयास में असफल होने से हार कैसे मान लें। बल्कि हमे तो अपनी असफलताओ से सीख लेनी चाहिए तथा अपनी कमी को दूर करके बार बार सफलता के लिए संघर्ष करना चाहिए। हमारे मन का विश्वास औऱ हमारी लगातार की कोशिश हमें हमारे लक्ष्य तक जरूर पहुँचाएगी।