
Sign up to save your podcasts
Or


The Styendra Podcast सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज । अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुच: ॥ ६६ ॥ शब्दार्थ सर्व-धर्मान्—समस्त प्रकार के धर्म; परित्यज्य—त्यागकर; माम्—मेरी; एकम्— एकमात्र; शरणम्—शरण में; व्रज—जाओ; अहम्—मैं; त्वाम्—तुमको; सर्व— समस्त; पापेभ्य:—पापों से; मोक्षयिष्यामि—उद्धार करूँगा; मा—मत; शुच:—चिन्ता करो ।. अनुवाद : समस्त प्रकार के धर्मों का परित्याग करो और मेरी शरण में आओ। मैं समस्त पापों से तुम्हारा उद्धार कर दूँगा। डरो मत। तात्पर्य : भगवान् ने अनेक प्रकार के ज्ञान तथा धर्म की विधियाँ बताई हैं— परब्रह्म का ज्ञान, परमात्मा का ज्ञान, अनेक प्रकार के आश्रमों तथा वर्णों का ज्ञान, संन्यास का ज्ञान, अनासक्ति, इन्द्रिय तथा मन का संयम, ध्यान आदि का ज्ञान। उन्होंने अनेक प्रकार से नाना प्रकार के धर्मों का वर्णन किया है। अब, भगवद्गीता का सार प्रस्तुत करते हुए भगवान् कहते हैं कि हे अर्जुन! अभी तक बताई गई सारी विधियों का परित्याग करके, अब केवल मेरी शरण में आओ। इस शरणागति से वह समस्त पापों से बच जाएगा, क्योंकि भगवान् स्वयं उसकी रक्षा का वचन दे रहे हैं। _________________________________________________________________________________________________________________________________________
Available On Spotify: https://open.spotify.com/show/3AdmI3o... Amazon Music : https://music.amazon.in/podcasts/9394... Twitter -: https://twitter.com/TheStyendraShowYou Tube : https://www.youtube.com/channel/UCrUcrLqEpaphKLW4S4O4nBg
By Styendra SinghThe Styendra Podcast सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज । अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुच: ॥ ६६ ॥ शब्दार्थ सर्व-धर्मान्—समस्त प्रकार के धर्म; परित्यज्य—त्यागकर; माम्—मेरी; एकम्— एकमात्र; शरणम्—शरण में; व्रज—जाओ; अहम्—मैं; त्वाम्—तुमको; सर्व— समस्त; पापेभ्य:—पापों से; मोक्षयिष्यामि—उद्धार करूँगा; मा—मत; शुच:—चिन्ता करो ।. अनुवाद : समस्त प्रकार के धर्मों का परित्याग करो और मेरी शरण में आओ। मैं समस्त पापों से तुम्हारा उद्धार कर दूँगा। डरो मत। तात्पर्य : भगवान् ने अनेक प्रकार के ज्ञान तथा धर्म की विधियाँ बताई हैं— परब्रह्म का ज्ञान, परमात्मा का ज्ञान, अनेक प्रकार के आश्रमों तथा वर्णों का ज्ञान, संन्यास का ज्ञान, अनासक्ति, इन्द्रिय तथा मन का संयम, ध्यान आदि का ज्ञान। उन्होंने अनेक प्रकार से नाना प्रकार के धर्मों का वर्णन किया है। अब, भगवद्गीता का सार प्रस्तुत करते हुए भगवान् कहते हैं कि हे अर्जुन! अभी तक बताई गई सारी विधियों का परित्याग करके, अब केवल मेरी शरण में आओ। इस शरणागति से वह समस्त पापों से बच जाएगा, क्योंकि भगवान् स्वयं उसकी रक्षा का वचन दे रहे हैं। _________________________________________________________________________________________________________________________________________
Available On Spotify: https://open.spotify.com/show/3AdmI3o... Amazon Music : https://music.amazon.in/podcasts/9394... Twitter -: https://twitter.com/TheStyendraShowYou Tube : https://www.youtube.com/channel/UCrUcrLqEpaphKLW4S4O4nBg