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भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को अनासक्त भाव में रहने के लिए कहा उन्होने कहा कि राजा जनक जैसे ज्ञानी पुरुष वैराग्य को उपलब्ध होते हुए भी अनासक्त भाव में जिए, वह निसंग भाव से कर्म करते रहे परन्तु वह कर्म में लिप्त नहीं हुए तथा कर्म करते हुए मानवता की भलाई के लिए कार्य करते रहे क्योंकि राजा जनक का सूत्र ही अनासक्ति योग है|
By Dr. Archika Didiभगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को अनासक्त भाव में रहने के लिए कहा उन्होने कहा कि राजा जनक जैसे ज्ञानी पुरुष वैराग्य को उपलब्ध होते हुए भी अनासक्त भाव में जिए, वह निसंग भाव से कर्म करते रहे परन्तु वह कर्म में लिप्त नहीं हुए तथा कर्म करते हुए मानवता की भलाई के लिए कार्य करते रहे क्योंकि राजा जनक का सूत्र ही अनासक्ति योग है|

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