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आत्मा स्थिर है, और शरीर चलायमान , भीतर की ज्योति का ज्ञान तो ध्यान के माध्यम से होता है। तब अनुभव होता है , कि शरीर और आत्मा में गहरा फासला है , पंचतत्वों के पार है आत्मा , जबकि शरीर क्षणभंगुर , जो कर्म फल पूरे होते ही साथ छोड़ देता है।
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By Dr. Archika Didiआत्मा स्थिर है, और शरीर चलायमान , भीतर की ज्योति का ज्ञान तो ध्यान के माध्यम से होता है। तब अनुभव होता है , कि शरीर और आत्मा में गहरा फासला है , पंचतत्वों के पार है आत्मा , जबकि शरीर क्षणभंगुर , जो कर्म फल पूरे होते ही साथ छोड़ देता है।
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