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क्यूं, हो गया गुमशुदा मैं सबके साथ होके भी..
आख़िर खुद से नाराजगी का कारण बता सकता नहीं था।।
क्यूं, कमज़ोर पड़ा दिल मेरा एक ओर दफा..
ये जानते हुए भी, की उसकी खुशी पे मेरा कोई हक नही था..!
क्यूं, दूर होके भी उससे, मेरा इश्क अभी तक जिंदा था।।
क्यूं, जानते हुए भी सब कुछ, मेरे दिल को कुछ पता नहीं था..।।
By Tatsat Pandeyक्यूं, हो गया गुमशुदा मैं सबके साथ होके भी..
आख़िर खुद से नाराजगी का कारण बता सकता नहीं था।।
क्यूं, कमज़ोर पड़ा दिल मेरा एक ओर दफा..
ये जानते हुए भी, की उसकी खुशी पे मेरा कोई हक नही था..!
क्यूं, दूर होके भी उससे, मेरा इश्क अभी तक जिंदा था।।
क्यूं, जानते हुए भी सब कुछ, मेरे दिल को कुछ पता नहीं था..।।