माँ एक जीवित रूप है जिस के आचरण से हम निस्वार्थ शब्द का सही अर्थ समझ सकते हैं यह ईश्वर की बनाई हुई वो गंगा हैं जो अनवरत संके घर में बहती है|बस कोशिश करना चाहिए हमसबको उसके मर्म को समझने की , जो माँ से वंचित है वो दर्द समझ पाता है 🙏यह आज की condition मे ज्यादा दिख रहा है |जिनके बच्चे कही दूर हैं और मिलने की कोई स्थिति नाही बन पा रही है |