Sutradhar Mini Tales (हिन्दी)

माँ ब्रह्मचारिणी


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नवरात्र पर्व के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। साधक इस दिन अपने मन को माँ के चरणों में लगाते हैं। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वालीं। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वालीं।

देवी के इस रूप ने भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण इस देवी को तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी नाम से जाना गया।

कहते है माँ ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से सर्वसिद्धि प्राप्त होती है। दुर्गा पूजा के दूसरे दिन देवी के इसी स्वरूप की उपासना की जाती है। इस देवी की कथा का सार यह है कि जीवन के कठिन संघर्षों में भी मन विचलित नहीं होना चाहिए।

मंत्र:

दधाना करपद्माभ्यामक्षमाला-कमण्डलू ।

देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

इस श्लोक में अनुत्तमा का अर्थ ' जिनसे अधिक उत्तम कोई नहीं ' ऐसे होता है । और अक्षमाला-कमण्डलू शब्द में दो वस्तु होने के कारण कमण्डलु शब्द के द्विवचन का प्रयोग है।

 

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Sutradhar Mini Tales (हिन्दी)By Sutradhar