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मानव जब संघर्षों से जूझता है या दुविधाओं में घिर जाता है तब हमें किसी ऐसे पथ प्रदर्शक की आवश्यकता होती है जो शोक से शांति तक और मोह से मोक्ष तक सब सिखा दे,
अंधकार में प्रकाश की लौ भी जला दे.....
यदि ऐसे मार्ग दर्शक के रूप में स्वयं ईश्वर आपकी उंगली पकड़ लें और कहें ....
" उठो पार्थ "....मैं हूँ ना
आपके भीतर का सत्य
जीवन के प्रत्येक द्वंद का उत्तर, और
हृदय गति में छिपा समाधान हूँ ....
" मैं कृष्ण हूँ "
By Dr. Rajnish Kaushikमानव जब संघर्षों से जूझता है या दुविधाओं में घिर जाता है तब हमें किसी ऐसे पथ प्रदर्शक की आवश्यकता होती है जो शोक से शांति तक और मोह से मोक्ष तक सब सिखा दे,
अंधकार में प्रकाश की लौ भी जला दे.....
यदि ऐसे मार्ग दर्शक के रूप में स्वयं ईश्वर आपकी उंगली पकड़ लें और कहें ....
" उठो पार्थ "....मैं हूँ ना
आपके भीतर का सत्य
जीवन के प्रत्येक द्वंद का उत्तर, और
हृदय गति में छिपा समाधान हूँ ....
" मैं कृष्ण हूँ "