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Main Shayar To Nahin Magar Ae Haseen


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मैं शायर तो नहीं, मगर ऐ हसीं
जब से देखा मैंने तुझको, मुझको शायरी आ गई
मैं आशिक तो नहीं, मगर ऐ हसीं
जबसे देखा मैंने तुझको, मुझको आशिकी आ गई
प्यार का नाम मैंने सुना था मगर
प्यार क्या है, ये मुझको को नहीं थी खबर
मैं तो उलझा रहा उलझनों की तरह
दोस्तों में रहा, दुश्मनों की तरह
मैं दुश्मन तो नहीं, मगर ऐ हसीं
जबसे देखा मैंने तुझको, मुझको दोस्ती आ गई
सोचता हूँ अगर मैं दुआ मांगता
हाथ अपने उठाकर मैं क्या मांगता
जबसे तुझसे मोहब्बत मैं करने लगा
तबसे जैसे इबादत मैं करने लगा
मैं काफ़िर तो नहीं, मगर ऐ हसीं
जबसे देखा मैंने तुझको, मुझको को बंदगी आ गई
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