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लिजिए सुनिये मेरी क़िताब कामिनी से एक और नई कविता!!
तेरे पाने की फेहरिस्त में, मैं शामिल ना रहूं लेकिन
मेरे खोने की क़ायिमा में बिना तेरे कुछ दिखाई नहीं देता।
तेरे अपनों की महफिल में, मेरा नाम ना सही लेकिन
मेरे अपनों में सिवा तेरे कोई नदारद नहीं मिलता।
तेरे सपनों में मेरा ना होना तुझे ना खलता हो लेकिन
मेरा कोई ख्वाब बिना तेरे पूरा नहीं होता।
तू चाहे तो जी ले जिंदगी मेरे बिना लेकिन
बिना तेरे मुझसे एक सांस भी लिया नहीं जाता।
भीड़ में तुझे मेरी याद चाहे ना आती हो लेकिन
बिना तेरी याद के मुझे कारवां भी वीराना सा लगता है।
तू जब चाहे बना दे मुझे बेगाना लेकिन
बिना तेरे मुझे मेरा साया भी पराया सा लगता है।
तेरी दुआओं में मेरी सलामती ना हो लेकिन
मेरे हर सजदे में तेरी बरकत की सदा रहती है।
तुझको डर लगता है ज़माने के कड़वे तानों से लेकिन
वो ताने ही मुझे तुझसे जुड़े होने का एहसास देते हैं।
By Aman Sinhaलिजिए सुनिये मेरी क़िताब कामिनी से एक और नई कविता!!
तेरे पाने की फेहरिस्त में, मैं शामिल ना रहूं लेकिन
मेरे खोने की क़ायिमा में बिना तेरे कुछ दिखाई नहीं देता।
तेरे अपनों की महफिल में, मेरा नाम ना सही लेकिन
मेरे अपनों में सिवा तेरे कोई नदारद नहीं मिलता।
तेरे सपनों में मेरा ना होना तुझे ना खलता हो लेकिन
मेरा कोई ख्वाब बिना तेरे पूरा नहीं होता।
तू चाहे तो जी ले जिंदगी मेरे बिना लेकिन
बिना तेरे मुझसे एक सांस भी लिया नहीं जाता।
भीड़ में तुझे मेरी याद चाहे ना आती हो लेकिन
बिना तेरी याद के मुझे कारवां भी वीराना सा लगता है।
तू जब चाहे बना दे मुझे बेगाना लेकिन
बिना तेरे मुझे मेरा साया भी पराया सा लगता है।
तेरी दुआओं में मेरी सलामती ना हो लेकिन
मेरे हर सजदे में तेरी बरकत की सदा रहती है।
तुझको डर लगता है ज़माने के कड़वे तानों से लेकिन
वो ताने ही मुझे तुझसे जुड़े होने का एहसास देते हैं।