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मधुशाला हिंदी के बहुत प्रसिद्ध कवि और लेखक हरिवंश राय बच्चन जी का अनुपम काव्य है। इसमें एक सौ पैंतीस रूबाइयां (यानी चार पंक्तियों वाली कविताएं) हैं।
मधुशाला बीसवीं सदी की शुरुआत के हिन्दी साहित्य की अत्यंत महत्वपूर्ण रचना है, जिसमें सूफीवाद का दर्शन होता है।
काव्यांजलि साहित्यिक समिति आप सभी के लिए इस अनुपम काव्य की कुछ अनूठी रुबाइयां लेकर प्रस्तुत है जिनके अर्थ व सार जीवन की हर राह पर पथ प्रशस्त करने योग्य हैं।
आइए हम जीवन के रहस्य उजागर करने वाली इस मधुशाला में स्वयं भी लीन हों व औरों के साथ भी इसके सार को बांटें।
आवाज़ - सक्षम पंत
रचना - हरिवंश राय बच्चन
साभार
काव्यांजलि साहित्यिक समिति 💐
By Kavyanjali - The Literary Club of Graphic Era Universityमधुशाला हिंदी के बहुत प्रसिद्ध कवि और लेखक हरिवंश राय बच्चन जी का अनुपम काव्य है। इसमें एक सौ पैंतीस रूबाइयां (यानी चार पंक्तियों वाली कविताएं) हैं।
मधुशाला बीसवीं सदी की शुरुआत के हिन्दी साहित्य की अत्यंत महत्वपूर्ण रचना है, जिसमें सूफीवाद का दर्शन होता है।
काव्यांजलि साहित्यिक समिति आप सभी के लिए इस अनुपम काव्य की कुछ अनूठी रुबाइयां लेकर प्रस्तुत है जिनके अर्थ व सार जीवन की हर राह पर पथ प्रशस्त करने योग्य हैं।
आइए हम जीवन के रहस्य उजागर करने वाली इस मधुशाला में स्वयं भी लीन हों व औरों के साथ भी इसके सार को बांटें।
आवाज़ - सक्षम पंत
रचना - हरिवंश राय बच्चन
साभार
काव्यांजलि साहित्यिक समिति 💐