आज के बदलते हुए परिवेश में अपने सपनों को पूरा करने के लिए हम अपने गाँव अपने घर से दूर शहरी क्षेत्रों में बस जाते हैं, दूर रहते हुए सिर्फ हम अपने गाँव को याद नहीं करते हैं, हमारा गाँव भी हमें उतना ही याद करता है, ये कविता इसी संदर्भ में है। By Richa Singh Somvanshi