
Sign up to save your podcasts
Or


लिजिए सुनिये मेरी क़िताब कामिनी से एक और नई कविता!!मेरे बाद भी तेरे आशिक़ हज़ार होंगे
मगर उनमें से कितने मुझ जैसे यार होंगे
सभी को तलब होगी बस जिस्म की तेरे
पर कितने फ़क़त इश्क़ निभाने को तैयार होंगे
तारीफ़ करेंगे सभी सूरत की तेरी
पर सीरत समझने को कितने तैयार होंगे
बिछा सकते हैं फूल सभी राहों में मगर
कांटे चुनने को कितने तैयार होंगे
पीना चाहेंगे सभी रस तेरी जवानी का
क़ैद होने को तुझमें कितने ही बेकरार होंगे
सभी बताएंगे तुझसे हाल-ए-दिल अपना
तेरा हाल सुनने को क्या फ़ुर्सत में वो यार होंगे
सभी तैयार हैं पार करने को हदें
हद बनाने में लेकिन कितने तेरे साथ होंगे
कपड़े उतारना आता है सभी को यहाँ
नज़रें उतारने को कितने हाथ होंगे
सभी जताएंगे तुझसे रुसवाइयाँ अपनी
तुझे मनाने को कितने तेरे पास होंगे
इश्क़ में दग़ा देना आम बात है
इश्क़ निभा जाए ऐसे कितने ही ख़ास होंगे
By Aman Sinhaलिजिए सुनिये मेरी क़िताब कामिनी से एक और नई कविता!!मेरे बाद भी तेरे आशिक़ हज़ार होंगे
मगर उनमें से कितने मुझ जैसे यार होंगे
सभी को तलब होगी बस जिस्म की तेरे
पर कितने फ़क़त इश्क़ निभाने को तैयार होंगे
तारीफ़ करेंगे सभी सूरत की तेरी
पर सीरत समझने को कितने तैयार होंगे
बिछा सकते हैं फूल सभी राहों में मगर
कांटे चुनने को कितने तैयार होंगे
पीना चाहेंगे सभी रस तेरी जवानी का
क़ैद होने को तुझमें कितने ही बेकरार होंगे
सभी बताएंगे तुझसे हाल-ए-दिल अपना
तेरा हाल सुनने को क्या फ़ुर्सत में वो यार होंगे
सभी तैयार हैं पार करने को हदें
हद बनाने में लेकिन कितने तेरे साथ होंगे
कपड़े उतारना आता है सभी को यहाँ
नज़रें उतारने को कितने हाथ होंगे
सभी जताएंगे तुझसे रुसवाइयाँ अपनी
तुझे मनाने को कितने तेरे पास होंगे
इश्क़ में दग़ा देना आम बात है
इश्क़ निभा जाए ऐसे कितने ही ख़ास होंगे