Kalam Bandagi

Mere liye Tum Kaafi Ho


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काफी दफा मंज़िल तक पहुंचना मुश्किल... पर
तुम्हारा खुद मंज़िल बन जाना जुनून बन जाने
सा लगता है....
काफी दफा अपने जज़्बातों को समझाना मुश्किल...पर
तुम्हारा खुद सब समझ जाना रुनझुन सुनने
सा लगता है....
काफी दफा "काफी है ये सब" कहना मुश्किल...पर
तुम्हारा खुद "मेरे लिए काफी" हो जाना सुकून मिल जाने
सा लगता है....
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Kalam BandagiBy jatin sachdeva