एक सच जो हर लिखने वाले की अन्तरात्मा झकझोर देता है वो है, उसे उस समय तवज्जो ना देना जब आवश्यक हो, बजाय जब वो रह ही न जाए तब के। "कविता को आवाज़ दी है थिएटर आर्टिस्ट और बहुत अच्छी आवाज़ की धनी, दोस्त पुष्पा ने।"
एक सच जो हर लिखने वाले की अन्तरात्मा झकझोर देता है वो है, उसे उस समय तवज्जो ना देना जब आवश्यक हो, बजाय जब वो रह ही न जाए तब के। "कविता को आवाज़ दी है थिएटर आर्टिस्ट और बहुत अच्छी आवाज़ की धनी, दोस्त पुष्पा ने।"