हमारे लिए सबसे मुश्किल वक्त वह होता है जब हम अपने अंतर्मन के द्वंद को, हमारी आंतरिक पीड़ा एवं दंश को , अपने परिजनों के सम्मुख व्यक्त नही कर पाते, आज के दौर में अन्यान्य युवा ऐसी ही मनोस्थिति से गुज़र रहे हैं, जो उनके परिजनों को अक्सर असमंजस की परिस्थिति में डाल देती है, इसी मनोभाव पर आधारित है "मेरी गुड़िया"!