हमें ऐसा कोई प्रयत्न करना होगा कि हम अप्रिय स्थितियों से भी एक नई दृष्टि तथा सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करें। नई दृष्टि और सकारात्मक दृष्टिकोण का विकास विषम परिस्थितियों में भी सहजता से किया जा सकता है। हर स्थिति व्यक्ति को आत्मविश्लेषण तथा पुनर्मूल्यांकन का अवसर प्रदान करती है। स्थिति जितनी विषम होगी, समस्या जितनी गहन होगी अथवा चोट जितनी गहरी होगी उतना ही अधिक आत्मविश्लेषण तथा पुनर्मूल्यांकन अपेक्षित होता है, क्योंकि छोटी-मोटी घटना पर तो हम विचार करते ही नहीं। प्रेमचंद ने यथार्थ ही कहा है, 'अपमान का डर कानून के डर से किसी तरह कम क्रियाशील नहीं होता।'
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