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महात्मा गांधी के नाम Episode 38


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ऐ करारे हिंद तु हैं इस चमन की आबरूह। इस सदी को आज भी हैं बस तेरी जुस्तूजु। इस वतन में एकता की तू नई दीवार था। दर्दमंदो का मुहाफिज़ उनका तू गमखार था।

हम सभी हैरत में डूबे सुनके तेरी  दास्ता। तूने अपने लहू से सींचा था ये गुलसिता। है दिलों में तेरी इज्ज़त और बुलंद तेरा मोकाम।मुल्क की ये कौमो मिल्लत तुझको करती है सलाम।

इंकलाबे रोशनी की एक नई आंधी था तू। अमन की इस राह पर तन्हा This poem is written by rizwan khan sultan alig Here’s an episode that will keep you waiting for the ne
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POEM HUBBy rizwan khan sultan alig