Original Podcast

Mind Master ( Audio Book Summary )


Listen Later

अपने सपनों की आवाज दिल में जिंदा रखें
बचपन के सबक और आदतें ताउम्र मन-मस्तिष्क में रहती हैं। मां के जोर देने पर मैंने बचपन से ही हर खेल के बाद उसके बारे में लिखना • शुरू कर दिया। जब आप छोटे होते हैं, तो कोई रुटीन फॉलो करने का दबाव नहीं होता, लेकिन पहले मैंने अपनी मां की संतुष्टि के लिए बाद में खुद के फायदे के लिए रुटीन फॉलो किया। मैं साफ-साफ अक्षरों में खेल के एक-एक चरण को लिखता और खेल में जहां बड़ी गलती करता, वहां दो बार अंडरलाइन करता। धीरे-धीरे ये आदत जीवन का हिस्सा बन गई। खेल में हार के बाद जब निराशा हावी होती थी. उस दौरान भी मैं खेल का लब्बोलुबाब लिखता और गीर करता कि कहां चूक हुई। इससे खेल के बारे में समझ विकसित होती चली गई। मां हमेशा कहा करती थीं कि अपने विचार, भले ही कैसे हों, लिख लो। एक दिन जब इन्हें पढ़ोगे तो अहसास होगा कि वे कितने खूबसूरत थे।
टैलेंट पौधे की तरह होता है। जब इसे परिश्रम से सींचा जाता है, तो ये पौधा बढ़ता है, शाखाएं फलती-फूलती हैं। सही पोषण ना मिले, तो पौधा मुरझा जाता है। कड़ी मेहनत से ना सिर्फ आपका टैलेंट निखरता है बल्कि आपकी छुपी हुई योग्यताएं बाहर आती हैं। इतने सालों तक शतरंज खेलने में अगर किसी एक चीज ने मुझे ताकत है, तो वो है जिज्ञासा उन चीजों को सीखने की इच्छा होनी चाहिए जिनमें आप अच्छे नहीं हैं।
बिना ये परवाह किए कि आप अपने लक्ष्य के कितने करीब हो या कितना फासला तय कर चुके हो, लक्ष्य की दिशा में काम करने का महत्व हमेशा बना रहता है। अगर आप उसको लकर दृढ़ता सबेर वो लक्ष्य हासिल हो ही जाता है। अगर सफलता इंतजार करा रही है तो भी उससे रिश्ता ना तोड़ें। बस अपने सपनों की आवाज दिल में जिंदा रखें। विश्वनाथन की किताब 'माइंड मास्टर'
...more
View all episodesView all episodes
Download on the App Store

Original PodcastBy Original Podcast