' मन की थाह '

' मन की थाह '- कविता -- ' संवार लो,संवार लो'


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............इसलिये कृष्ण कहते हैं, .'ऋतुओं में, मैं बसंत हूँ ।
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' मन की थाह 'By Dr.Pratibha Jain 'Pramit'