12 जनवरी को लिखी गयी इक ग़ज़ल के साथ उपस्थित हुई हूं यहां। इन पंक्तियों के साथ इक स्त्री के मन में चल रहे उथल-पुथल को बयां करने की इक छोटी सी कोशिश की हूं। उम्मीद है आप सबको यह पसंद आयेगा।
12 जनवरी को लिखी गयी इक ग़ज़ल के साथ उपस्थित हुई हूं यहां। इन पंक्तियों के साथ इक स्त्री के मन में चल रहे उथल-पुथल को बयां करने की इक छोटी सी कोशिश की हूं। उम्मीद है आप सबको यह पसंद आयेगा।