चाहे हम कुछ भी करें, फ़र्क इससे नही पड़ता की हम क्या कर रहे हैं, फ़र्क इससे पड़ता है की क्या हम उसे खुशी से कर रहे हैं या नहीं! हम बचपन में बिना कुछ किए, यूंही खुश थे, पर अब हमने अपने इस प्रकृति को अचेतन विचारों और भावनाओं से खो दिया हुई। खुश रहना हमारी मूल प्रकृति है, इसलिए अगर हमें ज़िंदगी को पूर्णता से जीना है तो, सबसे पहले हमें खुश रहना सीखना होगा, जीवन के हर पल में!