ये तुमसे कह दिया किसने
कि तुम बिन रह नहीं सकते
ये दुख हम सह नहीं सकते !!
चलो हम मान लेते हैं,
कि तुम बिन हम बहोत रोये,
कि रातों को नहीं सोये !
मगर अफसोस है जाना,
कि अब के तुम जो लौटोगे,
हमें तब्दील पाओगे !
बहोत मायूस होगे तुम
अगर तुम जानना चाहो
कि एैसा क्यूं किया हमने
तो सुन लो ग़ौर से जाना !
पुरानी अहद-ए-रफ़्ता की
रवायत तोड दी हमने
मुहब्बत छोड दी हमने !!