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विवाह का अभिप्राय प्रसन्नता था, क्योंकि यह निष्पाप अदन का अवशेष है। जिसने स्त्री ब्याह ली, उसने उत्तम पदार्थ पाया, और याहवे परमेश्वर का अनुग्रह उस पर हुआ है। विवाह की नियुक्ति प्रभु ने जाति के प्रजनन, परिवारों की स्थापना, और बच्चों की उत्पत्ति के लिए किया ताकि वहा आनन्द का साम्राज्य स्थापित हो। विवाह सबसे प्राचीन मानव प्रथा है।
हम एक निम्न नैतिक स्तर के युग में रहते हैं, जहां विवाह की प्रतिज्ञाएं सरलता से तोड़ दी जाती हैं और तलाक को साधारण बात माना जाता है। परमेश्वर के नियम और स्तर कभी नहीं बदलते।
By Jeffrey Dsouzaविवाह का अभिप्राय प्रसन्नता था, क्योंकि यह निष्पाप अदन का अवशेष है। जिसने स्त्री ब्याह ली, उसने उत्तम पदार्थ पाया, और याहवे परमेश्वर का अनुग्रह उस पर हुआ है। विवाह की नियुक्ति प्रभु ने जाति के प्रजनन, परिवारों की स्थापना, और बच्चों की उत्पत्ति के लिए किया ताकि वहा आनन्द का साम्राज्य स्थापित हो। विवाह सबसे प्राचीन मानव प्रथा है।
हम एक निम्न नैतिक स्तर के युग में रहते हैं, जहां विवाह की प्रतिज्ञाएं सरलता से तोड़ दी जाती हैं और तलाक को साधारण बात माना जाता है। परमेश्वर के नियम और स्तर कभी नहीं बदलते।