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मुझे कहीं दूर जाना है. कितनी दूर और कहाँ इसकी खुद मुझे खबर नहीं है.
हाँ बस इतना है कि अब थक सा गया हूँ खुद को साबित करते करते. अब तो बस एक ऐसी जगह की तलाश है जहाँ पर
मैं खुद अपने तरीके से रह पाऊं क्युकीं अब आदत नहीं रही इस दुनिया के तौर तरीकों से जीने की.
अब तो बस एक ऐसे सफर पर हूँ जिसकी ना तो मंजिल का कोई ठिकाना है और ना ही इस बात का की ये सफर कब तक चलेगा.
By Rajat Kumarमुझे कहीं दूर जाना है. कितनी दूर और कहाँ इसकी खुद मुझे खबर नहीं है.
हाँ बस इतना है कि अब थक सा गया हूँ खुद को साबित करते करते. अब तो बस एक ऐसी जगह की तलाश है जहाँ पर
मैं खुद अपने तरीके से रह पाऊं क्युकीं अब आदत नहीं रही इस दुनिया के तौर तरीकों से जीने की.
अब तो बस एक ऐसे सफर पर हूँ जिसकी ना तो मंजिल का कोई ठिकाना है और ना ही इस बात का की ये सफर कब तक चलेगा.