Preetibala

Munshi Premchand ki Kahani "BODH"


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पंडित चंद्रधर ने अपर प्राइमरी में मुदर्रिसी तो कर ली थी, किन्तु सदा पछताया करते थे कि कहाँ से इस जंजाल में आ फँसे। यदि किसी अन्य विभाग में नौकर होते, तो अब तक हाथ में चार पैसे होते, आराम से जीवन व्यतीत होता। यहाँ तो महीने भर प्रतीक्षा करने के पीछे कहीं पंद्रह रुपये देखने को मिलते हैं।

कहानी : बोध

लेखक  : मुंशी प्रेमचंद 

स्वर : प्रीतिबाला

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PreetibalaBy Preeti Bala Kumar